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सोमवार, 1 अगस्त 2011

अचल लक्छमन विशवास

अभी   तो   देखने   में  जवान   थे   और  उत्साह  नव-जवानों   का  था   और  एक  दिन   सुबह  उठकर  एख्बार  देखा  तो  ये  दुखद  समाचार  भी  पढ़ा  की  वोह  नहीं  रहे   ,  हम  को ये  मालूम  है  की   अब  ऐसी  ख़बरों  में  अधिकतर  ऐसे  ही  लोगों  का  नाम  होगा  जिनको  हम  जानते  हैं   मगर  अचल जी    से  तो  सिर्फ  तीन  मुलाक़ात  हो  सकीं   वोह  भी   जौहरी  साहेब  की  महरबानी  से.

ऐसे  लोग  ही  याद  किये  जाते  हैं   क्या  बात  थी ?    अपना  वोह  एक  अलग  छाप  छोडते थे   मगर  अब  तो  दूरी  बहुत  बढ़  गई  है  ये  कैसा   सफ़र  है  हम  साथ  साथ  चलते  हैं   एक  ही    गाडी  है   मगर  किसके  स्टेशन  कब  आएगा   कोई  नहीं  जानता 


ज़िन्दगी     ज़िन्दगी     ज़िन्दगी      कितनी  बेवफा  है 

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

मत पकड़ो किस्मत की बैसाखियाँ


मत पकड़ो किस्मत की बैसाखियाँ 
मत पकड़ो !
अन्यथा तुम्हारा श्रम , अपाहिज हो जाएगा ,
और तुम ,किस्मत पर आश्रित हो जाओगे,
तब तुम्हारे पेट की आग ,
तुम्हारी किस्मत बुझा सके गी क्या ?
बीमार माँ-बाप  की दावा दिला सके गी क्या ?
बच्चों के कपडे ,फीस दिला सके गी क्या ?
नहीं,हरगिज़  नहीं ! क्यों नहीं लेते  अपनी टांगों का सहारा 
कमज़ोर सही अपाहिज नहीं हैं .
तभी अपनी आवश्यकतायें पूरी कर सको गे.
अन्यथा 
सदैव किस्मत के अत्यचार सहोगे.


                          अचल लक्छमन विशवास 

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

,कफ़न

हर धर्म में 
शव पर डाला जाने वाला कपडा ,कफ़न होता है 
हम
हिन्दू ,मुसलमान , सिख, इसाई  बना सकते है 
पूजा के तरीके बदल सकते हैं ,
धर्मध्वज  अलग-अलग  रंग के बना सकते हैं,
धर्म के नाम पर हिंसा , आगज़नी, अत्याचार करा सकते हैं,
लेकिन कफ़न का रंग नहीं बदल सकते ,
कफ़न का नाम नहीं बदल सकते,
कफ़न हर मानव को अपने गले लगाता है,
इसलिए सभी धर्मों से सम्मान पाता है,
क्योंकि कफ़न मानव धर्म  मानता है 
मानव सेवा ही जानता है.
                                                    अचल लक्छ्मन विशवास 



शनिवार, 25 दिसंबर 2010

तुम ज़रूर आओगे

तुम ज़रूर आओगे 


फूलों के चहरे
शबनम ने धोये हैं 
दूब खिलखिला कर  हंस रही है 
चिड्या
चहक रही है पेड़ों की शाखाओं पर 
नीम के पेड़ पर बैठा कौवा 
मेहमान आयेंगे बता रहा है
सुनहरी दिशाएँ मुस्करा  रही हैं
हवा सरसराती हुई 
अपना दुपट्टा लहराती है
मुझे विश्वास है 
आज तुम ज़रूर आओगे 
नई सुबह बनकर
सुखद  समाचार के साथ संभवत:


{ आक्रोश से  लेखक  अचल लछमण विशवास }

आक्रोश

आक्रोश 
{प्रतिनिध  कविताएँ }
अचल लक्छ्मन  विशवास


मांडवी प्रकाशन  , गाज़ियाबाद 


मूल्य : १५०/-


इस्बं-८१-८२१२-०८८-८